पाकिस्तानी हिस्से में करतारपुर साहिब कॉरिडोर की आधारशिला बुधवार को रखी गई. इस मौके पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कार्यक्रम में अमन का पैगाम देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच जंग की सोचना पागलपन है. हमारे दोनों के पास एटमी हथियार हैं, तो इनके बीच जंग हो ही नहीं सकती.
इमरान खान ने कहा कि जब मैं सियासत में आया तो ऐसे लोगों से मिला जो बस अपने लिए ही काम करते थे, आवाम को भूल जाते थे. एक दूसरे किस्म का राजनेता है तो नफरतों के नाम पर नहीं बल्कि काम के नाम पर राजनीति करता था. उन्होंने कहा कि आज जहां पाकिस्तान-हिंदुस्तान खड़े हैं, 70 साल से ऐसा ही हो रहा है. दोनों तरफ गलतियां हुईं लेकिन हम जब तक आगे नहीं बढ़ेंगे, जंजीर नहीं टूटेगी.
इमरान खान ने आगे कहा कि हम एक कदम आगे बढ़कर दो कदम पीछे हट जाते हैं. हममें ये ताकत नहीं आई है कि कुछ भी हो हम रिश्ते ठीक करेंगे. अगर फ्रांस-जर्मनी एक साथ आ सकते हैं, तो फिर पाकिस्तान-हिंदुस्तान भी ऐसा क्यों नहीं कर सकते हैं. हमने भी एक-दूसरे के लोग मारे हैं, लेकिन फिर भी सब भूला जा सकता है. हमेशा कहा जाता था कि पाकिस्तान की फौज दोस्ती नहीं होने देगी, लेकिन आज हमारी पार्टी-पीएम-फौज एक साथ हैं.
इंसान चांद पर पहुंच चुका है लेकिन हम एक मसला हल नहीं कर पा रहे
इमरान ने कश्मीर पर बोलते हुए कहा कि हमारा मसला सिर्फ कश्मीर का है. इंसान चांद पर पहुंच चुका है लेकिन हम एक मसला हल नहीं कर पा रहे हैं. ये मसला जरूर हल हो जाएगा. इसके लिए पक्का फैसला जरूरी है. अगर हिंदुस्तान एक कदम आगे बढ़ाएगा तो हम दो कदम आगे बढ़ाएंगे.
इमरान खान ने सिद्धू पर बोलते हुए कहा कि जब पिछली बार सिद्धू वापस गए तो इनकी काफी आलोचना हुई, लेकिन एक इंसान जो शांति का पैगाम लेकर आया है वो क्या जुर्म कर रहा है. हमारे दोनों के पास एटमी हथियार हैं, तो इनके बीच जंग हो ही नहीं सकती है. दोनों देशों के बीच जंग का सोचना पागलपन है. फिर अगर जंग नहीं कर सकते तो जो कर सकते हैं वो करें. शांति की बात करें. अगर सिद्धू पाकिस्तान में चुनाव लड़ लें तो वो जीत सकते हैं. हम सिद्धू के प्रधानमंत्री बनने का इंतजार न करना पड़े. हम चाहते हैं कि दोनों मुल्कों के बीच में अमन हो.
गौरतलब है कि पाकिस्तान में बुधवार को करतारपुर साहिब कॉरिडोर की आधारशिला रखी गई. भारत की ओर से नवजोत सिंह सिद्धू और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल इस कार्यक्रम में मौजूद रहे. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बुधवार को कॉरिडोर का शिलान्यास किया. भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और हरदीप पुरी ने अटारी-वाघा सीमा को पार किया और कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे. पाकिस्तानी सेना के प्रमुख कमर जावेद बाजवा भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे.
नेहरू ने खरीदे थे 'तूफानी' विमान
Thursday, November 29, 2018
Tuesday, November 13, 2018
दसॉल्ट का पहला विदेशी ग्राहक था भारत, नेहरू ने खरीदे थे 'तूफानी' विमान
बहुचर्चित राफेल विमान डील पर देश में जारी राजनीतिक घमासान के बीच फ्रांस की दसॉल्ट कंपनी के सीईओ के इंटरव्यू से मामले ने फिर तूल पकड़ा है.
दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने समाचार एजेंसी ANI को इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का जवाब दिया.
अपने इंटरव्यू के दौरान उन्होंने भारत के साथ साझेदारी पर जोर दिया. ट्रैपियर ने बताया कि भारत के साथ उनकी साझेदारी 1953 में शुरू हुई थी, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की अगुवाई में भारत-दसॉल्ट के बीच करार हुआ था.
दसॉल्ट एविएशन की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, भारत और दसॉल्ट एविएशन के बीच 1953 में करार हुआ था. वेबसाइट के मुताबिक, 1953 में भारत ही कंपनी का पहला एक्सपोर्ट कस्टमर ( विदेशी कस्टमर) बना था. ( नीचे फोटो- दसॉल्ट की वेबसाइट से लिया गया है)
इतिहास को खंगाले तो आपको मालूम पड़ेगा कि भारत ने 1953 में फ्रांस की दसॉल्ट एविएशन से 71 Ouragan विमान खरीदे थे. भारत ने इस विमान का नाम तूफानी रखा था. ये विमान भारत को इतना पसंद आया कि दोबारा 113 विमानों का नया ऑर्डर गया था.
CEO ने दिया हर सवाल का जवाब
आपको बता दें कि फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने समाचार एजेंसी ANI को दिए गए इंटरव्यू में इस डील पर उठ रहे हर एक सवाल का जवाब दिया. इस इंटरव्यू में उन्होंने राहुल गांधी द्वारा लगाए गए हर आरोप को झूठा करार दिया.
एरिक ट्रैपियर ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वह बिल्कुल निराधार हैं. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने दसॉल्ट और रिलायंस के बीच हुए ज्वाइंट वेंचर (JV) के बारे में सरासर झूठ बोला है. उन्होंने कहा कि डील के बारे में जो भी जानकारी दी गई है वह बिल्कुल सही है, क्योंकि वे झूठ नहीं बोलते हैं.
राफेल विमान डील पर छिड़े विवाद ने अभी भी राजनीतिक तूल पकड़ा हुआ है. राजनीति के अलावा इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई जारी है. सोमवार को केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में राफेल डील से जुड़े सभी दस्तावेज सौंपे.
केन्द्र सरकार ने 36 राफेल विमानों की खरीद के संबंध जो भी फैसले लिए गए हैं, उन सभी की जानकारी याचिकाकर्ता को सौंप दी है. राफेल विवाद से जुड़ी याचिका वरिष्ठ वकील एमएल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी. केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कुल 9 पेज के दस्तावेज सौंपे हैं, जिनमें इस डील का पूरा इतिहास, प्रक्रिया को समझाया गया है.
सरकार ने दस्तावेजों में कहा है कि उन्होंने राफेल विमान रक्षा खरीद प्रक्रिया-2013 के तहत इस खरीद को अंजाम दिया है. विमान के लिये रक्षा खरीद परिषद की मंजूरी ली गई थी, भारतीय दल ने फ्रांसीसी पक्ष के साथ बातचीत की.
दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने समाचार एजेंसी ANI को इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का जवाब दिया.
अपने इंटरव्यू के दौरान उन्होंने भारत के साथ साझेदारी पर जोर दिया. ट्रैपियर ने बताया कि भारत के साथ उनकी साझेदारी 1953 में शुरू हुई थी, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की अगुवाई में भारत-दसॉल्ट के बीच करार हुआ था.
दसॉल्ट एविएशन की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, भारत और दसॉल्ट एविएशन के बीच 1953 में करार हुआ था. वेबसाइट के मुताबिक, 1953 में भारत ही कंपनी का पहला एक्सपोर्ट कस्टमर ( विदेशी कस्टमर) बना था. ( नीचे फोटो- दसॉल्ट की वेबसाइट से लिया गया है)
इतिहास को खंगाले तो आपको मालूम पड़ेगा कि भारत ने 1953 में फ्रांस की दसॉल्ट एविएशन से 71 Ouragan विमान खरीदे थे. भारत ने इस विमान का नाम तूफानी रखा था. ये विमान भारत को इतना पसंद आया कि दोबारा 113 विमानों का नया ऑर्डर गया था.
CEO ने दिया हर सवाल का जवाब
आपको बता दें कि फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने समाचार एजेंसी ANI को दिए गए इंटरव्यू में इस डील पर उठ रहे हर एक सवाल का जवाब दिया. इस इंटरव्यू में उन्होंने राहुल गांधी द्वारा लगाए गए हर आरोप को झूठा करार दिया.
एरिक ट्रैपियर ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वह बिल्कुल निराधार हैं. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने दसॉल्ट और रिलायंस के बीच हुए ज्वाइंट वेंचर (JV) के बारे में सरासर झूठ बोला है. उन्होंने कहा कि डील के बारे में जो भी जानकारी दी गई है वह बिल्कुल सही है, क्योंकि वे झूठ नहीं बोलते हैं.
राफेल विमान डील पर छिड़े विवाद ने अभी भी राजनीतिक तूल पकड़ा हुआ है. राजनीति के अलावा इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई जारी है. सोमवार को केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में राफेल डील से जुड़े सभी दस्तावेज सौंपे.
केन्द्र सरकार ने 36 राफेल विमानों की खरीद के संबंध जो भी फैसले लिए गए हैं, उन सभी की जानकारी याचिकाकर्ता को सौंप दी है. राफेल विवाद से जुड़ी याचिका वरिष्ठ वकील एमएल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी. केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कुल 9 पेज के दस्तावेज सौंपे हैं, जिनमें इस डील का पूरा इतिहास, प्रक्रिया को समझाया गया है.
सरकार ने दस्तावेजों में कहा है कि उन्होंने राफेल विमान रक्षा खरीद प्रक्रिया-2013 के तहत इस खरीद को अंजाम दिया है. विमान के लिये रक्षा खरीद परिषद की मंजूरी ली गई थी, भारतीय दल ने फ्रांसीसी पक्ष के साथ बातचीत की.
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